Monday, June 13, 2011

कुछ बतकही, विफलता, सफलता और जिंदगी पर

मेरे एक सहकर्मी हैं अखिलेश. कल उन्होंने फेसबुक पर अपने स्टेटस में फेल होने पर जान देनेवाले युवकों के घर के हालात का जिक्र किया. बतौर डेस्क पर्सन हम उन तमाम चीजों से व्यावहारिक तौर पर रू-ब-रू नहीं हो पाते हैं, जो एक रिपोर्टर अनुभव करता है. आज के दौर में भागमभाग वाली जिंदगी में फेल होने का डर कई लोग सहन नहीं कर पाते. अगर इंक्रीमेंट नहीं हुआ हो, तो गुस्सा काबू से बाहर हो जाता है. अगर किसी ने नई कार को चोट पहुंचा दी हो, तो मन बीमार होने लगता है. ब्रांडेड कपड़े नहीं पहने हों, तो मन में कहीं न कहीं एक कसक रह जाती है. कहने का ये मतलब है कि हमें सक्सेस छोटी मात्रा में ही, कहीं न कहीं चाहिए. जो हमें हमारी आत्मा को पूर्णता की ओर बढ़ने के क्षणिक एहसास से सराबोर करता रहे. इन सब क्रम में हम ये भूल जाते हैं कि फेल होना या पास होना हमारे विकास का एक हिस्सा है. ये हमें हमारी कमजोरियों को दूर करने का मौका देता है. मामला अब बाबा रामदेव का ही लें. बाबा फेल हो गए. बाबा ने मौका को पकड़ने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. शुरुआत इतनी शानदार रही, लेकिन अंजाम बदतर. ऐसे में हमारे बाबा भी अपनी विफलता से सबक ले सकते हैं. पूरे सिस्टम को बदलने के लिए जिस जनाक्रोश को संयुक्त धार चाहिए थी, वो नहीं मिली. उनके अनुयायी निराश हो गए. बाबा रामदेव या अन्ना हजारे मीडिया के कारण हिट हुए और मीडिया के कारण पिट भी गए. बात कर रहे थे, फेल होने की, तो फेल होना कोई एक अंतिम पड़ाव नहीं है. उसके आगे भी जिंदगी है. हमारे जो तमाम साथी फेल होने के बाद सर पिटते हैं, वो बिंदास होकर अगले इम्तिहान की तैयारी में जुट जा सकते हैं. बस मामला ये है कि आप अपने को कितना तैयार करते हैं. बड़े-बड़े लफ्फाज से ज्यादा दो शब्द, खुद के लिए ईमानदारी से मेहनत करना ही किसी भी सफलता के आवश्यक है. इसलिए जरूरी है कि हम अपने भीतर में पनप रही निराशा को दूर करें और खुद के उत्थान में लग जाए.

4 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी said...

आज की शिक्षा प्रणाली की यही तो खामी है !!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

रामदेव जी न ही चुके हैं और न ही चूके हैं.

prerna argal said...

saarthak aur satik lekh aaj ki so=iksha pranaali ki khamiyon ko darsaati hui.badhai.



please visit my blog.thanks.

प्रवीण पाण्डेय said...

राह कठिन हो तो असफलताओं के लिये तैयार रहना होगा।

यहां आइये,तो टिपियाइये, सिर्फ नकारात्मक शब्दों से बचें और सब मंजूर है। बहस को आगे बढ़ाये। सकारात्मक संवाद को बढ़ाने की दिशा में आपका सहयोग चाहिए। आप देंगे न!!

raftar

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