Thursday, August 11, 2011

अच्छा लगता है, तकिये पर सिर रख सपने देखना

बंद कमरे. ऊपर से थोड़ा अंधेरा. क्योंकि बाहर बारिश हो रही है और सूरज मामा बादलों की ओट में जा छुपे हैं. आपको लग रहा होगा कि जिंदगी सिमट गयी है. लेकिन जनाब शुक्र मनाइए खराब मौसम का कि आप जिंदगी के करीब आ गए. अपने अगल-बगल गुजरते पलों को समेट कर बेटे और बेटी को साथ देने का मौका मिल गया आपको. कुछ सोचने का मौका मिल गया. ये सोचने का मिल गया कि अब आगे मेरी जिंदगी कैसी होगी. भागती जिंदगी में आखिर मैंने क्या-क्या गंवा दिया. कुछ दिनों पहले तक बारिश से चिढ़ होती रहती थी. यहां रांची में छह दिनों से लगातार बेतरह बारिश हो रही है. खुदा भी अपने अंदाज में पूरी मिट्टी को भिगोने के मूड में है. गांव वालों के लिए ये बरसात आफत है, लेकिन शहरी मिजाज के लोगों के लिए ये बरसात भागती जिंदगी को पकड़ने का एक जरिया. बूंदों की टिपटिप कानों को सुकून देती है, तो तेज बारिश की झरझर मधुर संगीत का अहसास दिलाती है. मुझे अच्छा लगता है. अच्छा लगता है प्रकृति से धीरे-धीरे जुड़ने का अहसास. आफिस में बारिश के कारण रुक जाने पर अपने दोस्तों के साथ हंसी-मजाक करना. टापिक पर गंभीर बहस करना.कुछ कहना, कुछ बतियाना. अच्छा लगता है, तकिये पर सिर रख सपने देखना. अच्छा लगता है धीरे-धीरे चाय पीना. किसी दिन पानी का बहाना बना नहीं नहाना. कुरमुरा गयी शर्ट के साथ चुपचाप बिस्तर के कोने में निढाल होकर बैठे रहना. किसी पुराने दोस्त से यूं ही गरियाते हुए मस्त अंदाज में बतियाना. ये सब इस लंबी बारिश ने ही तो दिए हैं. जिसे मैं भागती जिंदगी में सालों से भूल गया था. जिंदगी को करीब से देखने का मौका दे गयी ये बारिश.






चलते... चलते निदा फजली की एक नज्म आपके लिए



उसने

अपना पैर खुजाया

अंगूठी के नग को देखा

उठकर

खाली जग को देखा

चुटकी से एक तिनका तोड़ा

चारपाई का बान मरोड़ा



भरे-पूरे घर के आंगन में

कभी-कभी वह बात

जो लब तक

आते-आते खो जाती है

कितनी सुंदर हो जाती है...

2 टिप्पणियाँ:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ji, behad achchha lagta hai, mujhe bhi..

प्रवीण पाण्डेय said...

बारिश स्मृति की जड़ता भी नम कर देती है।

यहां आइये,तो टिपियाइये, सिर्फ नकारात्मक शब्दों से बचें और सब मंजूर है। बहस को आगे बढ़ाये। सकारात्मक संवाद को बढ़ाने की दिशा में आपका सहयोग चाहिए। आप देंगे न!!

raftar

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